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Showing posts from October, 2019

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

मुझे खैरात मे मिली

मुझे खैरात मे मिली खुशियाँ अचछी नही लगती मै अपने गमो मे रहता हूँ नबावो कि तरह.......

नशा शराब का नहीं है यारों,

नशा शराब का नहीं है यारों, मेरी निगाहों पर मत जाना, शराबी ना समझ मुझे "सुशील", निगाहें यार की में है पूरा मयखाना।

तू इंसान है,अवतार नही

तेरे गिरने में तेरी हार नही तू इंसान है,अवतार नही गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नही....

शीशा या पत्थर हो हमेशा टूट जाता है

 बहुत पाने की चाहत मे बहुत कुछ छूट जाता है कोई शीशा या पत्थर हो हमेशा टूट जाता है करुँ कोशिश हजारो मै हजारो को मनाने की एक तो मान जाता है दूसरा रूठ जाता है

विकट घड़ी

चाहे कितनी हो विकट घड़ी , पर  अधरों पर  मुस्कान रहे, हो दृष्टि भले ही कदमो में , पर मस्तक पर अभिमान रहे ये हार जीत क़ा करना क्या  पर , जो भी हो बस  मान मिले हो भले पराजय रण में भी , पर मृत्यु में सम्मान मिले

लाख दुनिया वाले लेकिन...

मयखाने बंद कर दे चाहे... लाख दुनिया वाले लेकिन... शहर में कम नही है, ... निगाहों” से पिलाने वाले ....

सदियों से जागी आँखों को

सदियों से जागी आँखों को,  एक बार सुलाने आ जाओ।  माना कि तुमको प्यार नहीं,  नफ़रत ही जताने आ जाओ।   जिस मोड़ पे हमको छोड़ गए  हम बैठे अब तक सोच रहे।  क्या भूल हुई क्यों जुदा हुए,  बस यह समझाने आ जाओ।

धूल में धक्कड़

अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़, दोनों मूरख, दोनों अक्खड़, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, एक साथ एक बाट से लौटे । बात बात में बात ठन गई, बांह उठी और मूछ तन गई, इसने उसकी गर्दन भींची उसने इसकी दाढ़ी खींची । अब वह जीता, अब यह जीता दोनों का बन चला फजीता; लोग तमाशाई जो ठहरे — सबके खिले हुए थे चेहरे ! मगर एक कोई था फक्कड़, मन का राजम कर्रा-कक्कड़; बढ़ा भीड़ को चीर-चार कर बोला ‘ठहरो’ गला फाड़ कर । अक्कड़ मक्कड़ धुल में धक्कड़ दोनों मूरख दोनों अक्कड़, गर्जन गूंजी, रुकना पड़ा, सही बात पर झुकना पड़ा ! उसने कहा, सही वाणी में डूबो चुल्लू-भर पानी में; ताकत लड़ने में मत खोओ चलो भाई-चारे को बोओ ! खाली सब मैदान पड़ा है आफत का शैतान खड़ा है ताकत ऐसे ही मत खोओ; चलो भाई-चारे को बोओ ! सूनी मूर्खों ने जब बानी, दोनों जैसे पानी-पानी; लड़ना छोड़ा अलग हट गए, लोग शर्म से गले, छंट गए । सबको नाहक लड़ना अखरा, ताकत भूल गई सब नखरा; गले मिले तब अक्कड़ मक्कड़ ख़त्म हो गया धूल में धक्कड़

हमको तैराकी नहीं आई

फ़रेब-ए- ज़िन्दगी खाकर भी चालाकी नहीं आई, कि पानी में रहकर भी हमको तैराकी नहीं आई..!!

कुछ इश्क़ किया

कुछ इश्क़ किया  कुछ काम किया  वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे  जो इश्क़ को काम समझते थे  या काम से आशिक़ी करते थे हम जीते-जी मसरूफ़ रहे  कुछ इश्क़ किया  कुछ काम किया  काम इश्क़ के आड़े आता रहा  और इश्क़ से काम उलझता रहा  फिर आख़िर तंग आ कर  हम ने दोनों को अधूरा छोड़ दिया

कोई कुछ कहना चाहता है

कोई कुछ कहना चाहता है, तो कोई चुप हो के सुनना चाहता है, पर हर कोई अपनी जिंदगी जीना चाहता है।।  कोई दूसरे के लिए त्याग करना चाहता है, तो कोई दूसरे के लिए किसी को अपनाना चाहता है। कोई किसी के दुख सुख में हसना और रोना चाहता है तो कोई अपने मे ही खुश रहना चाहता है। पर हर कोई अपनी जिंदगी जीना चाहता है।।  कोई किसी को प्यार करना चाहता है तो कोई किसी को हार्ट करना चाहता है।  कोई सिर्फ अपने प्यार को पाने तथा प्यार के साथ जिंदगी बिताना चाहता है तो कोई प्यार का झूठा नाटक कर के उसके शरीर तथा प्यार को बदनाम करना चाहता है।  पर हर कोई अपनी जिंदगी जीना चाहता है।। 

सांप के काटने .....

सांप के काटने पर ये 2 इलाज जरूर पढ़ ले.. ना जाने कब आपके काम आ जाए और जिंदगी बच जाए : साँप के काटने का इलाज जरूर पढ़ें, पता नहीं कब आपके काम आ जाए : दोस्तो सबसे पहले साँपो के बारे मे एक महत्वपूर्ण बात आप ये जान लीजिये । कि अपने देश भारत मे 550 किस्म के साँप है । जैसे एक cobra है ,viper है ,karit है । ऐसी 550 किस्म की साँपो की जातियाँ हैं । इनमे से मुश्किल से 10 साँप है जो जहरीले है सिर्फ 10 । बाकी सब non poisonous है। इसका मतलब ये हुआ 540 साँप ऐसे है जिनके काटने से आपको कुछ नहीं होगा8 बिलकुल चिंता मत करिए । लेकिन साँप के काटने का डर इतना है (हाय साँप ने काट लिया ) और कि कई बार आदमी heart attack से मर जाता है ।जहर से नहीं मरता cardiac arrest से मर जाता है । तो डर इतना है मन मे । तो ये डर निकलना चाहिए । वो डर कैसे निकलेगा ??? जब आपको ये पता होगा कि 550 तरह के साँप है उनमे से सिर्फ 10 साँप जहरीले हैं । जिनके काटने से कोई मरता है । इनमे से जो सबसे जहरीला साँप है उसका नाम है russell viper । उसके बाद है karit इसके बाद है viper और एक है cobra । king cobra जिसको आप कहते है काला ना...

संत की सीख

संत की सीख  पुराने समय में एक संत शहर से बाहर झोपड़ी बनाकर रहते थे। शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वे काफी प्रसिद्ध थे। इसकारण शहर से दूर होने के बाद भी लोग रोज उनसे मिलने आते और जीवन की परेशानियों का हल पाते थे। कई बार अनजान लोग भी उनके पास रुकते और अपनी उलझनों का निराकरण पूछते। कभी-कभी वहां से निकलने वाले यात्री उनसे शहर की बस्ती का रास्ता भी पूछते थे। संत उन्हें सामने की ओर इशारा करके रास्ता बता देते थे। कुछ लोग पूछते कि क्या कोई दूसरा रास्ता नहीं है तो संत कहते कि नहीं बस्ती का यही रास्ता है। > जब लोग संत के बताए रास्ते पर जाते तो आगे चलकर वे श्मशान पहुंच जाते थे। इसके बाद लोगों को काफी गुस्सा आता था। कुछ लोग संत को गालियां देते। कुछ लोग चुपचाप दूसरा रास्ता खोजने लगते थे। एक दिन एक यात्री के साथ जब यही हुआ तो उसे संत पर बहुत गुस्सा आया। > क्रोधित यात्री संत को बुरा-भला कहने के लिए उनके पास पहुंच गया। संत से कहा कि तुमने गलत रास्ता क्यों बताया? उसने संत को खूब खरी-खोटी सुनाई, जब बोलते-बोलते यात्री थक गया तो वह चुप हो गया। इसके बाद संत ने बोलना शुरू किया। ...

भूल गये हो मुझको

हरे पेड़ की ठंडी छाँव  चन्द्र सुशोभित मेरे गांव  भूल गये हो मुझको पर याद तो होगा मेरा गाँव तेरे यादों के बाहर खड़े उन सब पेड़ के पत्तों पर सुबह सवेरे अब भी ओस जम तो जाती होगी सच कहना तब तुमको गांव याद तो आती होगी।

मुहब्बत में दूर होना....

सिसकती राते और वो ना होना तुम्हारा, कितनी खलता है मुहब्बत में दूर होना....

हो सके तो लौट आओ......

हो सके तो लौट आओ, भावनाओं में ह्रदय बन; प्रेम के कुछ गीत हैं, जिनमें कथानक मर रहा है। अनलिखा है, अनपढ़ा है, अनकहा भी रह न जाए; कल्पना बीमार हो जब कौन शब्दों को सजाए? कौन स्याही में ज़रा-सा मन निचोड़े आज फिर से? कौन काग़ज़ पर तुम्हारे नाम के मोती उगाए? हर तरफ़ तम से घिरा है आस का दीपक अभागा; कृष्णपक्षी चाँद जैसे सांस अंतिम भर रहा है। क्या ज़रूरी है गगन को हर दफ़ा धरती बुलाए? क्यों नदी ही बस समंदर को हमेशा गुनगुनाए? फिर पुरानी है कहानी, एक प्यासा, इक कुँआ है; प्रश्न भी फिर से वही है, कौन, किसके पास आए? देहरी से ही न जाए लौटकर मधुमास के पल; आँख में सावन सहेजे मौन पतझर डर रहा है। तुम अगर आओ, महावर लाल हो-हो कर लजाए; झाँक कर मेरे नयन में टूटता दरपन जुड़ाए; मेघ अलकों को सँवारे, चाँदनी पग को पखारे; ओस की पायल पिरोकर, रात पैरों में पिन्हाए; याचना, अधिकार बनकर, प्रेम में व्याकुल समर्पण;  एक पत्थर से निरन्तर प्रार्थनाएँ कर रहा है।

वो इल्जाम लगाते हैं

वो इल्जाम लगाते हैं  हम इश्क़ करते हैं । वो अपनी करती हैं, हम अपना करते हैं।

चेहरे की चमक ओर मकान की ऊँचाइयों पर मत जाओ ..।.

चेहरे की चमक ओर मकान की ऊँचाइयों पर मत जाओ ..।. घर के बुजुर्ग अगर हंसते हुए मिले तो समज लेना की ये घर अमीरों का हैं...

सबकी जोली भरने वाले मेरी भी जोली भर दे

सबकी जोली भरने वाले मेरी भी जोली भर दे  एक छोटी मेरी भी आस है इसे भी पूरी कर दे  वेसे तो की है बहुत सारी दुवाए मेने तूजे बस ये वाली दुआ तु आज क़बूल कर दे 

एक हाथ में चाय हो दूजे में उनका हाथ हो

एक हाथ में चाय हो दूजे में उनका हाथ हो  दोनो साथ हो एसी रंगीन शाम हो  दोनो में दो चार बारे हो  एसी शुरुआत हो तो क्या बात हो ...

रात भर

रात भर तड़पते रहे मेरी याद में, सुबह हुई तो पता चला अब जिंदगी भर तड़पना है उसकी याद में।

दुआ क़बूल

इसके सिवा किसी की चाहत में टूट ने का दर्द कोन जान सकता है .. इसी लिए तो वो टूट ने के बाद भी किसी दुआ क़बूल करता हैं

तुम्हारे माथे पर खिसक

तुम्हारे माथे पर खिसक रही दो चार जुल्फों में मेरी जीवनी लिपटी है, जब हवा चलती है तो तुम्हारी जुल्फों पर लदा मेरा ह्रदय झूलता है तुम्हारे होंठ मेरे स्वप्नों का पालना है मैं तुम्हारे प्रेम में पड़ा नवजात शिशु हूँ

भूल जाए तुमको कोई इरादा नहीं

भूल जाए तुमको कोई इरादा नहीं हैं तेरे सिवा किसी और से वादा कोई नहीं हैं निकाल देते दिल से शायद तुमको मगर इस नादान दिल में कोई दरवाजा नहीं है

झिलमिलाती तारों की रात

चलों जाये वहां .... जहां झिलमिलाती तारों की रात हो... ठंडी हवाओं की बहार हों ....मन में एक दुजे के लिये बस थोडी तकरार भरा प्यार हों ...