होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..
विकट घड़ी
चाहे कितनी हो विकट घड़ी , पर अधरों पर मुस्कान रहे, हो दृष्टि भले ही कदमो में , पर मस्तक पर अभिमान रहे ये हार जीत क़ा करना क्या पर , जो भी हो बस मान मिले हो भले पराजय रण में भी , पर मृत्यु में सम्मान मिले
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