विकट घड़ी Skip to main content

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

विकट घड़ी


चाहे कितनी हो विकट घड़ी , पर  अधरों पर  मुस्कान रहे,

हो दृष्टि भले ही कदमो में , पर मस्तक पर अभिमान रहे

ये हार जीत क़ा करना क्या  पर , जो भी हो बस  मान मिले

हो भले पराजय रण में भी , पर मृत्यु में सम्मान मिले

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होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

वो थक जायगा

बीछड कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जायगा और मेरे गले से आ लगेगा मे मुस्किल मे तुमारे काम आऊ या ना आऊ  बस तुम आवज लगा देना मुजे अच्छा लगेगा

काले धन की तरह छुपा रखा है

काले धन की तरह छुपा रखा है तुम्हारी मोहब्बत अपने दिल में जान, कहीं हंगामा ना हो जाये, इसलिए हम खुलासा नही करते।