हमारी राह ऐसी थी कि.... हम गिरते ही रह गए। मुश्किलों से हर घड़ी ....सामना करते ही रह गए। कभी पहुंचे ही नहीं हम हमको जाना जहां था, मंजिल दूर इतनी थी कि......हम संभलते ही रह गए।
गलतियों से जुदा तू भी नही मैं भी नही,दोनों इंसान है खुदा तू भी नही,मैं भी नही..! तू मुझे और मैं तुझे इल्ज़ाम देते है मगर अपने अंदर झाँकता तुम भी नही,मैं भी नही..! गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियाँ,वरना फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..!
गलतियों से जुदा तू भी नही मैं भी नही,दोनों इंसान है खुदा तू भी नही,मैं भी नही..! तू मुझे और मैं तुझे इल्ज़ाम देते है मगर अपने अंदर झाँकता तुम भी नही,मैं भी नही..! गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियाँ,वरना फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..!
भीगीं यादें आती हैं तो वो सौगात मेरी नहीं जो याद बहुत आती है वो बात मेरी नहीं क्यूं इल्जाम देते हो मुझको ही हर बात का जो ख्वाब इतने लाती हैं वो रात मेरी नहीं
हम मर्यादित है तो क्या ... तुम जो चाहे वो बक जाओगे इतने टुकडो में काटेंगे कि गिनते गिनते थक जाओगे सहते रहना हर जुल्म तुम्हारा ये तो अच्छी बात नही.... सर्प गले का शिव को काटे ये उसकी औकात नही और राग अलापा गर काश्मीर का तो स्वर्ग लोक पहुँचा देंगे और छप्पन इंची सीने की ताकत फिर से दिखला देंगे.. ✍✍✍