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Showing posts from August, 2019

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

एक नजर

एक नजर में पूरी दुनिया बदल डाली..... मेरे दिल से अंखियों ने बगावत कर डाली।।                   

मंजिल दूर इतनी थी

हमारी राह ऐसी थी कि.... हम गिरते ही रह गए। मुश्किलों से हर घड़ी ....सामना करते ही रह गए। कभी पहुंचे ही नहीं हम हमको जाना जहां था, मंजिल दूर इतनी थी कि......हम संभलते ही रह गए।                   

दिल के दरवाजे

🌺🌺  दिल के दरवाजे खुले हो तो परिंदे भी लौट आते हैं. 🕊🕊 उनका दीया दर्द ही इतना खूबसूरत है खुदा. 🌹🌹 ए जख्म  भी मुस्कुराते हैं

मदहोश

हम इसी महक से मदहोश हुए  सोचा, वो भी सब भूल कर हम में मशरूफ हुए मगर उनकी तो आदत थी न सबको अपना बनाने की  ओर वो न जाने कितनों की गोद मे गुम हुए ~बम

गलतियों से जुदा तू भी नही

गलतियों से जुदा तू भी नही मैं भी नही,दोनों इंसान है खुदा तू भी नही,मैं भी नही..! तू मुझे और मैं तुझे इल्ज़ाम देते है मगर अपने अंदर झाँकता  तुम भी नही,मैं भी नही..! गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियाँ,वरना फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..!

फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..!

गलतियों से जुदा तू भी नही मैं भी नही,दोनों इंसान है खुदा तू भी नही,मैं भी नही..! तू मुझे और मैं तुझे इल्ज़ाम देते है मगर अपने अंदर झाँकता  तुम भी नही,मैं भी नही..! गलतफहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियाँ,वरना फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..!

वहीं अधूरे ख्वाब

वहीं अधूरे ख्वाब जब सपने बन जाते है जिन्हे हम जागते हुए भी हम अपनी आंखों में पाते हैं। कभी तुम भी ख्वाबों में आओ और सपना बन के मेरी हो जाओ।

भीगीं यादें आती हैं

भीगीं यादें आती हैं तो वो सौगात मेरी नहीं जो याद बहुत आती है वो बात मेरी नहीं क्यूं इल्जाम देते हो मुझको ही हर बात का जो ख्वाब इतने लाती हैं वो रात मेरी नहीं               

स्वर्ग लोक पहुँचा देंगे

हम मर्यादित है तो क्या ... तुम जो चाहे वो बक जाओगे  इतने टुकडो में काटेंगे कि  गिनते गिनते थक जाओगे  सहते रहना हर  जुल्म तुम्हारा  ये तो अच्छी  बात नही.... सर्प गले का शिव को काटे  ये उसकी औकात नही  और राग अलापा गर काश्मीर का  तो स्वर्ग लोक पहुँचा देंगे और छप्पन इंची सीने की  ताकत फिर से दिखला देंगे.. ✍✍✍

भगवान

याद करना तो अपने अख्तियार में है। और तुझ से मिलना तो  भगवान की मेहरबनि। मिलना तो चाहता हूं तुझसे पर मुझे तोड़ देता है तुझ से मिल के विचड़ने का ग़म।

याद

जब भी वो ज़ुल्म ईज़ाद करता है..! सबसे पहले मुझे ही याद किया करता है..!!