फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..! Skip to main content

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

फितरत का बुरा तू भी नही,मैं भी नही..!

गलतियों से जुदा तू भी नही
मैं भी नही,दोनों इंसान है
खुदा तू भी नही,मैं भी नही..!
तू मुझे और मैं तुझे इल्ज़ाम देते है
मगर अपने अंदर झाँकता 
तुम भी नही,मैं भी नही..!
गलतफहमियों ने कर दी दोनों में
पैदा दूरियाँ,वरना फितरत का बुरा
तू भी नही,मैं भी नही..!

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