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Showing posts from January, 2019

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

प्यार सच्चा

मेरा प्यार सच्चा था इसलिए तेरी याद आती है, अगर तेरी बेवफाई भी सच्ची है तो अब यादों में मत आना

क़िस्मत

आँख की क़िस्मत है अब बहता समुंदर देखना और फिर इक डूबते सूरज का मंज़र देखना

मंज़िल

परिंदों को मिलेगी मंज़िल यक़ीनन, ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर, ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं

मेरे एहसासों

मुझे फर्क नहीं पड़ता कभी मिलो न मिलो तुम मेरे एहसासों में रहते हो बस इतना ही काफी हैं !!  

जिद्द

ना जाने इस जिद्द का नतीजा क्या होगा, समझता दिल भी नहीं वो भी नहीं और हम भी नहीं

आँखों में आंसू

कभी आयी तेरी याद माँ तो हम जी भर के रो लिए कभी जागेह हम सारी रात तो कभी दिन में ही सो लिए आंसुओ से तुम्हारे न होने का गम मिटा रहा हूँ क्या बताऊ कैसे जीए जा सराहा हु तुम्हारा दुलार बहुत याद आता है हर बार आँखों में आंसू छोड़ जाता है ॥

महफ़िल

कारीगर हूं साहेब, शब्दों की मिट्टी से महफ़िल सजाता हूँ.... किसी को बेकार, किसी को लाजवाब नज़र आता हूं.....

कीमत

हमने कब कहा के, कीमत समझो तुम हमारी, गर हमे बिकना ही होता, तो आज यूँ अकेले न होते।

मोहब्बत

उसकी मोहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब था, अपना भी नही बनाया और किसी और का भी ना होने दिया।

इश्क़

दर्द होगा, बेचैनी होगी, कसक होगी, बेक़रारी होगी, अगर इश्क़ करते हो तो आपको भी ये बीमारी होगी!                    

इंसानियत

इंसान की इंसानियत उसी समय खत्म हो जाती है जब उसे दूसरों के दुख में हँसी आने लगती है !!😔  

हार मानने

जैसे ही आप हार मानने की सोचें उस कारण को याद कर ले जिसकी वजह से अभी तक डटे हुए थे              

दौड़ते हुए बहुत दूर तक आ गए

ज़िन्दगी में दौड़ते हुए बहुत दूर तक आ गए पीछे रह गयी यादे सपने साथ आ गए जाने क्या बिगाड़ा था मेने उनका बहती रही ख्वाहिशे ओर आँसू के किनारे तक गए                      

धड़कन

तुम्हें देखकर बढ़ जाती है धड़कन दिल की लगता है कि तुम राह नहीं मेरी मंजिल की मैं तुम्हें निहारता रहूँगा अतीत की गलियों में जिंदगी गुजार दूँगा गुमनाम लेकिन, तुम से कभी नहीं मिलूँगा.....    "क्योंकि तुम अमानत हो किसी और की"        # एक ढलती शाम का गुमनाम मुसाफ़िर #

प्यार

दिल आने की बात है यारो अपने बस की बात कहां प्यार अगर हो पत्थर से फिर हीरे की औकात कहा