कभी आयी तेरी याद माँ तो हम जी भर के रो लिए कभी जागेह हम सारी रात तो कभी दिन में ही सो लिए आंसुओ से तुम्हारे न होने का गम मिटा रहा हूँ क्या बताऊ कैसे जीए जा सराहा हु तुम्हारा दुलार बहुत याद आता है हर बार आँखों में आंसू छोड़ जाता है ॥
तुम्हें देखकर बढ़ जाती है धड़कन दिल की लगता है कि तुम राह नहीं मेरी मंजिल की मैं तुम्हें निहारता रहूँगा अतीत की गलियों में जिंदगी गुजार दूँगा गुमनाम लेकिन, तुम से कभी नहीं मिलूँगा..... "क्योंकि तुम अमानत हो किसी और की" # एक ढलती शाम का गुमनाम मुसाफ़िर #