दौड़ते हुए बहुत दूर तक आ गए Skip to main content

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

दौड़ते हुए बहुत दूर तक आ गए

ज़िन्दगी में दौड़ते हुए बहुत दूर तक आ गए
पीछे रह गयी यादे सपने साथ आ गए
जाने क्या बिगाड़ा था मेने उनका
बहती रही ख्वाहिशे ओर आँसू के किनारे तक गए
                     

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होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

वो थक जायगा

बीछड कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जायगा और मेरे गले से आ लगेगा मे मुस्किल मे तुमारे काम आऊ या ना आऊ  बस तुम आवज लगा देना मुजे अच्छा लगेगा

काले धन की तरह छुपा रखा है

काले धन की तरह छुपा रखा है तुम्हारी मोहब्बत अपने दिल में जान, कहीं हंगामा ना हो जाये, इसलिए हम खुलासा नही करते।