होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..
हम मर्यादित है तो क्या ...
तुम जो चाहे वो बक जाओगे
इतने टुकडो में काटेंगे कि
गिनते गिनते थक जाओगे
सहते रहना हर जुल्म तुम्हारा
ये तो अच्छी बात नही....
सर्प गले का शिव को काटे
ये उसकी औकात नही
और राग अलापा गर काश्मीर का
तो स्वर्ग लोक पहुँचा देंगे
और छप्पन इंची सीने की
ताकत फिर से दिखला देंगे..
✍✍✍
तुम जो चाहे वो बक जाओगे
इतने टुकडो में काटेंगे कि
गिनते गिनते थक जाओगे
सहते रहना हर जुल्म तुम्हारा
ये तो अच्छी बात नही....
सर्प गले का शिव को काटे
ये उसकी औकात नही
और राग अलापा गर काश्मीर का
तो स्वर्ग लोक पहुँचा देंगे
और छप्पन इंची सीने की
ताकत फिर से दिखला देंगे..
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