होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..
संत की सीख
पुराने समय में एक संत शहर से बाहर झोपड़ी बनाकर रहते थे। शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में वे काफी प्रसिद्ध थे। इसकारण शहर से दूर होने के बाद भी लोग रोज उनसे मिलने आते और जीवन की परेशानियों का हल पाते थे। कई बार अनजान लोग भी उनके पास रुकते और अपनी उलझनों का निराकरण पूछते। कभी-कभी वहां से निकलने वाले यात्री उनसे शहर की बस्ती का रास्ता भी पूछते थे। संत उन्हें सामने की ओर इशारा करके रास्ता बता देते थे। कुछ लोग पूछते कि क्या कोई दूसरा रास्ता नहीं है तो संत कहते कि नहीं बस्ती का यही रास्ता है।
> जब लोग संत के बताए रास्ते पर जाते तो आगे चलकर वे श्मशान पहुंच जाते थे। इसके बाद लोगों को काफी गुस्सा आता था। कुछ लोग संत को गालियां देते। कुछ लोग चुपचाप दूसरा रास्ता खोजने लगते थे। एक दिन एक यात्री के साथ जब यही हुआ तो उसे संत पर बहुत गुस्सा आया।
> क्रोधित यात्री संत को बुरा-भला कहने के लिए उनके पास पहुंच गया। संत से कहा कि तुमने गलत रास्ता क्यों बताया? उसने संत को खूब खरी-खोटी सुनाई, जब बोलते-बोलते यात्री थक गया तो वह चुप हो गया। इसके बाद संत ने बोलना शुरू किया।
> संत ने कहा कि क्यों भाई श्मशान बस्ती नहीं है? तुम लोग जिसे बस्ती कहते हो, वहां रोज किसी न किसी की मौत होती है, रोज किसी न किसी का घर उजड़ जाता है, लोगों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन श्मशान की बस्ती में एक बार जो आ जाता है, वह फिर कहीं और नहीं जाता, ये भी एक बस्ती है, यहां जो एक बार बस गया, वो हमेशा के लिए यहीं का हो जाता है। मेरी नजर में यही बस्ती है। हर व्यक्ति का अंतिम लक्ष्य यही है, सभी को यहीं आना है। इसीलिए हमें गलत कामों से बचना चाहिए। इन कारणों से मैंने तुम्हें ये रास्ता बताया था।
> संत की ये बात सुनकर यात्री नतमस्तक हो गया और अपनी मंजिल की ओर आगे निकल गया।

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