होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..
शीशा या पत्थर हो हमेशा टूट जाता है
बहुत पाने की चाहत मे बहुत कुछ छूट जाता है कोई शीशा या पत्थर हो हमेशा टूट जाता है करुँ कोशिश हजारो मै हजारो को मनाने की एक तो मान जाता है दूसरा रूठ जाता है
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