तू इंसान है,अवतार नही Skip to main content

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

तू इंसान है,अवतार नही


तेरे गिरने में तेरी हार नही
तू इंसान है,अवतार नही
गिर,उठ,चल,दौड़ फिर भाग
क्योंकि
जीवन संक्षिप्त है
इसका कोई सार नही....

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बीछड कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जायगा और मेरे गले से आ लगेगा मे मुस्किल मे तुमारे काम आऊ या ना आऊ  बस तुम आवज लगा देना मुजे अच्छा लगेगा

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काले धन की तरह छुपा रखा है तुम्हारी मोहब्बत अपने दिल में जान, कहीं हंगामा ना हो जाये, इसलिए हम खुलासा नही करते।