होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..
आग सीने में दबाए
आग सीने में दबाए रखिए लब पे मुस्कान सजाए रखिए ज़ुल्म की रात भी कट जाएगी आस का दीप जलाए रखिए जिस से दब जाएँ कराहें घर की कुछ न कुछ शोर मचाए रखिए ग़ैर मुमकिन है पहुँचना उन तक उनकी यादों को बचाए रखिए जाग जाएगा तो हक़ माँगेगा सोए इन्सां को सुलाए रखिए
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