ख्यालों तक ही सिमटी रहे Skip to main content

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

ख्यालों तक ही सिमटी रहे


कुछ चीज़ें ख्यालों तक ही सिमटी रहे तो अच्छी है
कुछ चीजें दुनिया की नजरों से दूर रहे तो सच्ची है,
पहली ही बारिश में हो सकते हो बेदख़ल घर से तुम
यहाँ हर मकान पक्का पर इनकी नींव ही कच्ची है।

Comments

Popular posts from this blog

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

वो थक जायगा

बीछड कर उसका दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जायगा और मेरे गले से आ लगेगा मे मुस्किल मे तुमारे काम आऊ या ना आऊ  बस तुम आवज लगा देना मुजे अच्छा लगेगा

काले धन की तरह छुपा रखा है

काले धन की तरह छुपा रखा है तुम्हारी मोहब्बत अपने दिल में जान, कहीं हंगामा ना हो जाये, इसलिए हम खुलासा नही करते।