मेरी किस्मत Skip to main content

होंठ झुके जब होंठों

होंठ झुके जब होंठों पर.. साँस उलझी हो साँसों में .. दो जुड़वा होंठों की बात कहो आँखों से ..

मेरी किस्मत

मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें 
चल निकलते जो में पिए होते 
क़हर हो या भला हो , जो कुछ हो 
काश के तुम मेरे लिए होते 
मेरी किस्मत में ग़म गर इतना था 
दिल भी या रब कई दिए होते 
आ ही जाता वो राह पर ‘ग़ालिब ’
कोई दिन और भी जिए होते

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